Rajasthan Assembly Update: स्पीकर वासुदेव देवनानी और डोटासरा के बीच सदन में हल्की-फुलकी नोक-झोंक

Rajasthan Assembly Update: स्पीकर वासुदेव देवनानी और डोटासरा के बीच सदन में हल्की-फुलकी नोक-झोंक

Rajasthan Assembly Update: Speaker Vasudev Devnani and Dotasara

Rajasthan Assembly Update: Speaker Vasudev Devnani and Dotasara

'मैं केवल नाम पुकारने वाला अध्यक्ष नहीं हूं', राजस्थान विधानसभा में बोले स्पीकर वासुदेव देवनानी, डोटासरा ने ली चुटकी

Rajasthan Vidhan Sabha Today: राजस्थान विधानसभा में कल के हंगामे और वॉकआउट के बाद आज माहौल बदला-बदला नजर आया. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जहां 'संरक्षण' मांगा, वहीं स्पीकर वासुदेव देवनानी ने आंकड़ों के साथ बताया कि विपक्ष को उम्मीद से ज्यादा समय मिला है. अंत में डोटासरा की चुटकी ने सदन का माहौल खुशनुमा कर दिया.

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'मैं केवल नाम पुकारने वाला अध्यक्ष नहीं हूं', राजस्थान विधानसभा में बोले स्पीकर वासुदेव देवनानी, डोटासरा ने ली चुटकी

विधानसभा अपडेट: कल के हंगामे पर आज सदन में हुई चर्चा, स्पीकर ने कहा- चेयर का अपमान बर्दाश्त नहीं, डोटासरा ने की हंसी-मजाक

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Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Assembly) की कार्यवाही शुक्रवार को शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tika Ram Jully) ने कल के घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा. जूली ने सीधे तौर पर स्पीकर को संबोधित करते हुए कहा कि सदन में विपक्ष का असली संरक्षक अध्यक्ष होता है, लेकिन कल जो स्थितियां बनीं उससे सदस्य आहत हुए. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के सचेतक का व्यवहार अव्यावहारिक था और विपक्ष को बोलने ही नहीं दिया गया. जूली ने तंज कसते हुए कहा, 'हमारा माइक ही नहीं खोला गया, अगर खोल देते तो हम अपनी बात रख देते.' उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं के दोहराव न होने और अध्यक्ष से पूर्ण संरक्षण की मांग की.

'परंपराओं में लेशमात्र भी कमी नहीं आने देंगे'

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने सरकार की ओर से मोर्चा संभालते हुए बहुत ही संयमित तरीके से जवाब दिया. उन्होंने कहा कि सदन की स्वस्थ परंपराओं को कायम रखना सबकी जिम्मेदारी है और वे भरोसा दिलाते हैं कि मर्यादाओं में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी. पटेल ने मुख्य सचेतक पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी को बोलने का अवसर मिला है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य सचिव के व्यवहार को लेकर विपक्ष के आरोप निराधार हैं और अध्यक्ष चाहें तो इसकी जांच करवा सकते हैं. पटेल ने अंत में कहा कि वाद-विवाद और उग्रता लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन यह व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी तक नहीं पहुंचनी चाहिए.

'विपक्ष को सवा गुना ज्यादा समय मिला'

स्पीकर वासुदेव देवनानी ने सदन में आंकड़ों का पिटारा खोलते हुए विपक्ष की नाराजगी को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने बताया कि 18 से 26 फरवरी तक की चर्चा में सत्ता पक्ष को करीब 25 घंटे मिले, तो कांग्रेस को 21 घंटे 26 मिनट का समय दिया गया, जो नियमों के हिसाब से मिलने वाले समय से कहीं ज्यादा है. देवनानी ने अनुशासन पर जोर देते हुए कहा, 'मैं सिर्फ नाम पुकारने वाला अध्यक्ष नहीं हूं.' उन्होंने नाराजगी जाहिर की कि मना करने के बावजूद कुछ सदस्यों के नाम बार-बार सूची में जोड़े गए, जो चेयर का अपमान है. उन्होंने व्यवस्था दी कि अब से दोनों पक्षों के सचेतक लिस्ट को पहले अध्यक्ष से अप्रूव करवाएंगे, तभी चर्चा होगी.

डोटासरा की चुटकी और खिलखिला उठा सदन

गंभीर बहस के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने माहौल को हल्का करने का जिम्मा संभाला. डोटासरा ने मजाकिया अंदाज में स्पीकर से पूछा, 'आप उम्र में बड़े हैं या श्रवण जी?' देवनानी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'उम्र में तो मैं ही बड़ा हूं.' इस पर डोटासरा ने तुरंत चुटकी लेते हुए कहा, 'क्षमा बड़न को चाहिए... आपको बड़ा दिल रखना चाहिए.' स्पीकर ने भी नहले पर दहला मारते हुए कहा, 'लेकिन छोटों को भी बड़ों का कहना मानना चाहिए.' इस नोकझोंक के बाद सदन में ठहाके गूंज उठे और कल की कड़वाहट भूलकर कार्यवाही सुचारू रूप से आगे बढ़ी.